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Sunday, December 13, 2015

Man Sleep after SEX

लिंग बाहर खींच कर वीर्य स्खलन... जानिए, कुछ जरूरी बातें:


लिंग बाहर खींच कर वीर्य स्खलन' की गर्भ निरोधन प्रक्रिया के कई नाम हैं। और कई नामों के साथ साथ इसके जुडी उतनी ही गलत धारणाएं भी प्रचलित हैं। इस पौराणिक गर्भनिरोधन प्रणाली से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में आप यहाँ जान सकते हैं:

मिथ्या- लिंग बाहर निकाल कर वीर्य स्खलन गर्भ से बचने का अचूक तरीका है
ये तरीका साधारण है, स्खलन से ठीक पहले लिंग बाहर खींच लिया जाये ताकि योनि के अंदर वीर्य न पहुंचे। ये तरीका कारगर तो हो सकता है लेकिन सौ फीसदी कामयाब नहीं।

इस तरीके का प्रयोग सही तरीके से किया जाये तब भी 100 में से 4 महिलाओं को गर्भ ठहर ही जाता है। और जिन लोगों ने इस काम में दक्षता हासिल नहीं की है, उन लोगों में गर्भ ठहरने का हर साल का प्रतिशत 27 तक पाया गया। यदि पुरुष सही समय पर लिंग बाहर खींच भी ले तो भी गर्भ ठहरने की पूरी सम्भावना को नाकारा नहीं जा सकता क्यूंकि सेक्स के दौरान संभव है की थोड़ी मात्रा में वीर्य का रिसाव हो रहा हो और आप अनभिज्ञ हों। यही छोटी मात्रा का रिसाव गर्भ की वजह बन सकता है।

मिथ्या- लिंग बाहर निकल कर स्खलन करना आसान क्रिया है
यह सुनने में आसान भले ही लगता हो, लेकिन असल में उतना आसान नहीं है, खासकर उनके लिए जो हाल ही में ये तरीका अपनाने लगे हैं। इसके लिए दोनों साथियों में सही तालमेल की ज़रूरत होती है। अनचाहे गर्भ के खतरे से सुरक्षा के लिए ज़रूरी है की आप कोई और विश्वसनीय तरीका अपनाएं।

सही समय पर लिंग खींचना:

मिथ्या- सही समय पर लिंग खींच लेने के लिए पुरुषों पर भरोसा किया जा सकता है वो जोड़े जिनमें आत्म-नियंत्रण, अनुभव और विश्वास हो, इस तरीके का उपयोग सही तरीके से कर सकते हैं। अगर तीनो में से एक भी चीज़ की कमी हो तो बेहतर है की कोई और तरीका अपनाया जाये।

जो पुरुष इस तरीके का प्रयोग करते हैं, उन्हें इस बात का सही अंदाज़ा होना चाहिए की कब उनका स्खलन होने वाला है, क्यूंकि गलती की गुंजाइश बहुत काम है।

इसलिए यह तरीका अनुभवहीन या शीघ्रपतन से जूझ रहे पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं है। क्यूंकि अगर सही समय पर लिंग बाहर न निकला जाये तो गर्भ ठहर सकता है।

मिथ्या- लिंग बाहर निकाल कर स्खलन करना कारगर नहीं है
इस तरीके को अक्सर असरदार तरीका नहीं माना जाता जबकि सच ये है की 60 प्रतिशत जोड़ों ने इसका प्रयोग कभी न कभी ज़रूर किया है।

हालाँकि गटमाकर संस्थान, न्यूयॉर्क द्वारा की गयी रिसर्च से पता चलता है की अगर लिंग को सही समय बाहर निकाल लिया जाये तो अनचाहे गर्भ से 96 फ़ीसदी तक बचा जा सकता है। कंडोम की मदद से इस बचाव की संख्या है 98 फीसदी। ज़्यादा फर्क नहीं, है ना?

सही तरीके से अंजाम दिया जाये तो ये अवश्य एक कारगर तरीका हो सकता है। बात ये है की हर बार इसे सही अंजाम देना शायद आसान नहीं है। लेकिन फिर भी, कोई तरीका इस्तेमाल ना करने से बेहतर ये तरीका ही है।

मिथ्या- इसका प्रयोग सिर्फ गैर ज़िम्मेदार लोग करते हैं
हाल ही के एक अमरीकी अध्यन से पता चलता है की 5 फीसदी लोग गर्भ से बचाव के लिए केवल इसी तरीके का प्रयोग करते हैं, 15-44 साल की 60 फीसदी महिलाओं ने इस तरीके का इस्तेमाल कभी ना कभी किया है।

लिंग बाहर खींच कर वीर्य स्खलन...

कामसूत्र और युवा:


कामसूत्र की प्रासंगिकता तो हर समय बनी रहेगी। युवा पीढ़ी न केवल सेक्‍स पर बात करने को लेकर अधिक मुखर हो रही है, वहीं वह इससे जुड़ी रुढि़वादी सोच को भी छोड़ रही है। युवा सेक्‍स को केवल अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने भर का जरिया नहीं मानते हैं, बल्कि वे इसका भरपूर आनंद उठाते हैं। उन्‍हें सेक्‍स को लेकर नए-नए प्रयोग करने से भी गुरेज नहीं है। वे सेक्‍स को लेकर पहले से अधिक स्‍वच्‍छंद सोच रखने लगे हैं। कई सेक्‍स सर्वे लगातार इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि सेक्‍स को लेकर भारत की सोच बदल रही है। युवाओं के लिए अब शादी से पहले सेक्‍स भी गुनाह नहीं है। ऐसे में कामसूत्र की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। कामसूत्र में सुरक्षित सेक्‍स के बारे में भी तफसील से बताया गया है। सेक्‍स करते हुए क्‍या-क्‍या सावधानियां बरती जाएं जिससे कि आप सुरक्षित आनंद उठा सकें, इस पर चर्चा की गयी है।

युवा और सेक्‍स-संबंध:

सेक्‍स कई युवाओं के लिए एक खेल की तरह हो गया है। जिसका आनंद दोनों मिलकर उठाते हैं। उनके लिए इस खेल में दोनों विजेता होते हैं। न कोई हारता है और न किसी की जीत होती है। अगर कहीं कोई 'हार' भी जाए तो वह अपनी हार पर भी आनंदित ही होता है। इस खेल की व्‍यावहारिक और उपयोगी नियम-पुस्तिका की तरह ही है कामसूत्र।

कामसूत्र के फायदे:

आधुनिक समय में युवाओं के बीच कामसूत्र की महत्ता बढ़ी है। पुराने जमाने में लोग कामसूत्र पर चर्चा करने से कतराते थे, लेकिन अब कामसूत्र को सेक्‍स के प्रति शिक्षित करने वाली पुस्‍तक के रूप में देखा जा रहा है। संभोग आसनों के बारे में अध्‍ययन करने से युवाओं को फायदा होगा और सेक्‍स संबंध बनाते वक्‍त गलतियां नही करेंगे। और सेक्‍स के चरमानंद की वास्‍‍तविक अनुभूति प्राप्‍त कर सकेंगे। कामसूत्र यह ज्ञान देता है कि कैसे एक अच्‍छा सेक्‍स संबंध जीवन पर सकारात्‍मक प्रभाव डालता है। सेक्‍स के दौरान दोनों साथियों की क्‍या भूमिका होनी चाहिए। पुरुष और स्‍त्री को सेक्‍स के दौरान किन बातों पर ध्‍यान रखना चाहिए।

कामसूत्र और युवा:

कामसूत्र है प्रेम का आधार:


कामसूत्र... यह नाम सुनते ही आपके मन-मस्तिष्‍क में सबसे पहला शब्‍द आता होगा सेक्‍स। लेकिन, क्‍या कामसूत्र को केवल सेक्‍स से जोड़कर देखना ठीक होगा। शायद नहीं... कामसूत्र जीवनशैली के बारे में बात करती है, न सिर्फ केवल सेक्‍स के बारे में। इसमें बताया गया है कि जीवनशैली किस तरह सेक्‍स जीवन को प्रभावित करती है।

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी का असर वैवाहिक संबंधों पर भी पड़ा है। शारीरिक संसर्ग उत्‍साह और आनंद के लिए नहीं, अपितु केवल औपचारिकता के लिए किए जाने लगे हैं। तमाम सेक्‍स सर्वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि वैवाहिक जोड़ों में सेक्‍स के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। लेकिन, कामसूत्र के वास्‍तविक ज्ञान को अपने वैवाहिक जीवन में अपनाकर उसे हमेशा तरोताजा रखा जा सकता है।

कामसूत्र का अर्थ है सेक्‍स की सही जानकारी। सेक्‍स के बारे में समाज में व्‍याप्‍त मिथ और भ्रामक जानकारियों को दूर करने में भी कामसूत्र मदद करता है। कामसूत्र का मतलब केवल सेक्‍स संबंध ही जीवन नही है बल्कि पारिवारिक जीवन का सही तरीके से निर्वहन भी कामसूत्र है।

कामसूत्र में स्त्री और पुरुष की शारीरिक संरचना और मनोविज्ञान पर भी विस्‍तार से चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि प्रेम और संभोग किस तरह एक दूसरे पर आश्रित हैं। कामसूत्र सिखाता है कि प्रेम का आधार है संभोग और संभोग का आधार है प्रेम।

प्रेम केवल मन या दिल में नहीं पनपता। यह शरीर में भी होता है। कामसूत्र में उन्‍होंने बताया है कि यदि स्त्री-पुरुष एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करना महत्‍वहीन है। प्रेम का आरंभ तो शरीर से ही होता है। पहले शरीर ही शरीर को देखता है। यदि पुरूष में पौरुषत्व है और स्‍त्री उसकी तरफ आकर्षित है तो एक दूसरे के मोहपाश से बचना असंभव है।

सेक्‍स संबंध ही दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति का आधार हैं। काम (सेक्‍स) के सम्मोहन के कारण ही स्त्री-पुरुष विवाह सूत्र में बंधने को तैयार होते हैं। कामसूत्र में काम (सेक्‍स संबंध बनाने के तरीके) के विभिन्‍न प्रकार के आसनों के बारे में भी बताया गया है। कामसूत्र का उद्देश्‍य उत्तेजित करना नहीं वरन् सेक्‍स और उससे जुड़े मुद्दों पर सही ज्ञान देना है। इसमें संभोग के हर पहलू को विस्‍तार से वर्णित किया गया है।

कामसूत्र है प्रेम का आधार:

आज की इस तेज रफ्तार भरी जिंदगी में अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हों तो एक-दूसरे के साथ बैठने और बातचीत के लिए भी समय निकालना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर पड़ता है उनकी सेक्स लाइफ पर।


नियमित सेक्स
यह सच है कि तनाव और थकान का पति-पत्नी के यौन जीवन पर बुरा असर पड़ता है, मगर वहीं यह भी सच है कि सेक्स ही आपके जीवन में पैदा होने वाले दबावों और परेशानियों से जूझने का टॉनिक भी बनता है। इसलिए कोशिश करें कि सप्ताह में तीन बार तक सेक्स संबंध जरूर बनाये, इससे आपकी सेक्स लाइफ मधुर होगी।

• रिश्तों में निकटता लाये
सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं सेक्स का असर आपसी रिश्तों पर भी पड़ता है। रिश्तों में निकटता लाकर पति-पत्नी सेक्स लाइफ को मधुर बना सकते है, उनके पास आपस में एक-दूसरे से कहने लिए बहुत कुछ होता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा बातें करें,

• सेक्स ऐसा जिसे दोनों एंज्वाय करें
मनोचिकित्सकों का मानना है कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए ऐसा सेक्स जरूरी है जिसे पति-पत्नी दोनों एंज्वाय करें। इसके लिए जरूरी है कि इसे एक मशीनी क्रिया में बदलने की बजाय दिलचस्प बनाने पर जोर दिया जाए। इसमें फोरप्ले और कल्पनाशीलता की अहम भूमिका होती है। दरअसल यही आपको तनाव से मुक्त करता है और एक-दूसरे के करीब लाता है। सेक्स के दौरान सिर्फ एक-दूसरे के अंगों को सहलाकर और चूमकर शिथिलता दूर की जा सकती है। आपस में मधुर बातें, ओरल सेक्स या हस्तमैथुन के जरिए रुटीन की सेक्स लाइफ को ज्यादा स्पाइसी बनाया जा सकता है।

• अपने साथी को समय दें
शादी के कुछ सालों बाद कुछ जोड़े पाते हैं कि सहवास और दृढ़ता अपनी वास्तविक चमक खोती जा रही है साथ ही दिन-ब-दिन सहवास करना सिर्फ एक रुटीन उद्देश्य रह जाता है. इसलिए अपने साथी को पूरा-पूरा टाइम दें, इसका सबसे बेहतर तरीका है कि पॉजिटिव प्रयासों से अपने पार्टनर को बहकाएं,

अच्छी तरह बढ़ कर तैयारी करें
यदि आप बाहर खाना या फिल्म देखने का मन बनाते हैं तो यह एक बेहतर अवसर है जहां आप एंज्वाय करेंगे. बहलाने का कोई भी मौका मिलता है तो उसे न छोड़ें। यही स्थिति ऐसी होगी जब आपका पार्टनर सहजता से सोचेगा कि आप उसे कितना चाहते हैं। कभी-कभी उसे उपहार भी दें। जैसे उसकी बगैर जानकारी के उसके लिये उसका पसंदीदा परफ्यूम लाकर दें या फिर कोई सहवासी सा अण्डरवियर उसे गिफ्ट करें। ऐसे में जब भी वह इनका प्रयोग करेगी आपको याद करे रोमांचित होगी।

• आपस में छेड़छाड़ करें
आपसी छेड़छाड़ दो प्रेमियों के बीच का महत्वपूर्ण फोरप्ले होती है। इस दौरान धीमी लाइट जलाकर कोई पसंदीदा संगीत चालू कर लें। छेड़छाड़ के बीच-बीच में एक दूसरे को किस करने का मौका न गंवाएं साथ ही एक दूसरे से चिपक कर लेटे,इस दौरान पूरी सौम्यता बरते न कि सीधे सेक्सक के लिए उन्मुख हो जाएं। इससे सेक्सक लाइफ में मधुरता आएगी।

Pahli Raat Ke Nuske.......


सेक्स और उम्र:


सेक्सुअल घनिष्ठता को उम्र बढ़ने के साथ प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता क्योंकि आत्मीयता की चाहत का उम्र से कोई सम्बन्ध नहीं है। आज के दौर में जबकि ज्ञान की शक्ति और चिकित्सा विज्ञान की अभूतपूर्व प्रगति के कारण लोग अधिक लम्बाध, स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताते हैं ऐसे में सेक्सुअली सक्रिय रहना शारीरिक और मानसिक तंदुरूस्ती के लिए बेहतर साबित होता है।

सेक्सुअल पैटर्न और पुरूष की उम्र:

व्यक्ति के सेक्सुअल पैटर्न में पूरी जिंदगी बदलाव होते हैं। जहां एक किशोर की प्रजनन क्षमता तेरह वर्ष की उम्र से शुरू हो सकती है वहीं उसकी सेक्सुअल क्षमताओं का चरम अठारह वर्ष की उम्र में हो सकता है। तीस से चालीस की उम्र के बाद पुरूष की सेक्सुअल प्रतिक्रियाओं में कुछ कमी आना शुरू हो जाती है और पचास की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लिंग में कठोरता और स्खलन की आवृत्तियों में स्पष्ट कमी आ जाती है। लेकिन ये केवल शारीरिक बदलाव हैं जो सेक्स के आनंद को कोई विशेष प्रभावित नहीं करते। कोई पुरूष यदि स्वास्थ्‍य सम्बन्धी किसी समस्या का सामना न कर रहा हो तो वह पूरे जीवन भर सेक्स लाईफ का आनंद ले सकता है।

सेक्सुअल पैटर्न और महिलाओं की उम्र:


लड़कियों में बारह से तेरह वर्ष की उम्र तक यौवन का विकास शुरू हो जाता है लेकिन पूरे जीवन भर उनके शरीर में हॉर्मोन सम्बन्धी बदलाव होते रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ हॉर्मोन स्तरों में उतार-चढ़ाव होने से संभोग में भाग लेना कठिन हो जाता है क्योंकि योनि की त्वेचा पतली हो जाती है और चिकनाई भी घट जाती है। मेनोपॉज की स्थिति चालीस से पचास की उम्र के बीच में आती है और अनेक असुविधाजनक समस्याएं उत्पन्न करती है। इसे प्रजनन क्षमता का समापन माना जाता है।

Sex and age


आपको नहीं मालूम होंगे कंडोम के ये 4 साइड इफेक्ट्स:

दर्द एवं एलर्जी:

ऐसा देखा गया है कि लगातार अर्थात सप्ताह में दो से अधिक बार कंडोम का उपयोग करने से योनि की आंतरिक परत और झिली में संवेदनशीलता काम या समाप्त हो जाती है। जिसके कारण स्त्रियों की यौनि से स्खलित होने वाले प्राकृतिक लुब्रिकेंट (चिकनाई युक्त) दृव्यों का स्वत: स्खलन कम हो जाता है या पूरी तरह से बन्द हो भी जाता है। जिसके चलते योनि में खरास या सूखापन आता देखा गया है। जिसके कारण कंडोम का अधिक उपयोग करने वाली औरतों की योनि स्पर्श कातर (छुअन से ही दर्द महसूस होने वाली) हो जाती है। ऐसी स्थिति का सामना कर रही स्त्रियों द्वारा अपने प्रेमी या पति के साथ बिना कंडोम के सेक्स करने पर यौनि में असहनीय दर्द, जलन, एलर्जी और खुजली होना आम बात है।

योनि ग्रीवा में कट या घाव:

कंडोम का अधिक उपयोग करने से योनि ग्रीवा में कटाव और छिलन के साथ-साथ दर्दनाक घाव भी होते देखे गये हैं। जिसके चलते योनि में सूजन आ जाती है। योनि में सूजन की स्थिति में सेक्स करने पर योनि का आन्तरिक हिस्सा फिर से घायल हो जाता है। जिससे योनि में फिर से जख्म हरे हो जाते हैं। कई बार जख्मों से रक्तस्त्राव भी होने लगता है। जिसे स्त्रियां असमय मासिक चक्र का आना मानकर उसकी परवाह नहीं करती हैं और इस कारण से उन्हें जननांगों और गर्भाशय में भयंकर संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। जिससे योनि ग्रीवा या गर्भाशय में कैंसर होने का खतरा भी बना रहता है।

लेटेक्स के बने कंडोम:

लेटेक्स के बने कंडोम आपको गर्भधारण और यौन-संचारित रोगों से बचाते हैं। मगर ये ऐलर्जी का सबसे आम कारण हैं और सेक्स के दौरान स्त्री की प्रतिक्रिया को घटा देते हैं, क्योंकि इसके प्रयोग के कारण योनि में सूखापन और खुजली के रूप में देखा गया है। इसका सबसे खराब दुष्प्रभाव है, स्त्री-पुरुष के जननांगों पर गंभीर दाने या जानलेवा आघात के रूप में दिख सकता है।

योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान:

प्रकृति ने जननांगों को खुद ही अपनी प्रतिरक्षा की जन्मजात शक्ति प्रदान की लेकिन यदि सप्ताह में दो बार से अधिक कंडोम का उपयोग किया जाता है तो कंडोम योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके उपयोग से योनि की अम्लीय वातावरण में उथल-पुथल पैदा हो जाती है।

Condom ke 4 Side Effects




आपकी जीवनशैली और सेक्स लाइफ:

किसी आदमी की सेक्स लाइफ पूरी तरह से उसकी जीवनशैली पर निर्भर करती है। जीवनशैली बदलने का सबसे ज्यादा प्रभाव सेक्स लाइफ पर पड़ता है। दिनभर ऑफिस में काम करके आदमी जब थककर घर जाता है, तब उसकी सेक्स के प्रति कोई रुचि नहीं होती है और इस वजह से पार्टनर से दूरियां बढती जाती हैं। ज्यादा धूम्रपान और शराब की लत भी सेक्स लाइफ को प्रभावित करती है। व्यस्त जीवनशैली के बावजूद आप अपनी यौन ऊर्जा, प्रेम और व्य‍वहार कुशलता से अपनी सेक्स लाइफ को बेहतरीन बना सकते हैं और अपने दांपत्य जीवन में मिठास घोल सकते हैं।

जीवनशैली का सेक्स लाइफ पर प्रभाव -

काम की व्यस्त‍ता और सेक्स लाइफ -
एकल परिवार और मेट्रो सिटी में रहने वाले ज्या‍दातर लोग कामकाजी हैं। अपनी बढती जरूरतों को पूरा करने के लिए पती और पत्नी दोनों मिलकर काम करते हैं। दिनभर काम के दौरान थकान स्वाभाविक है। अक्सर लोग देर रात तक काम करते है और बाहर भी रहते हैं। इसका सबसे बुरा असर आदमी की सेक्स लाइफ पर पडता है क्योंकि थकान के बाद सेक्स की इच्छा लगभग समाप्त हो जाती है। और अगर मूड भी हो तो वह केवल एक औपचारिकता रह जाती है जिससे आपका पार्टनर कभी भी संतुष्ट नहीं होता है।

खान-पान और सेक्स लाइफ -
जंक फूड और फास्ट फूड के खाने का चलन बढा है। जंक फूड ज्यादा खाने से कई बीमारियां जैसे डायबिटीज, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां हो जाती हैं। जंक फूड मोटापे को बढाने का प्रमुख कारण होता है। मोटे लोगों को सेक्स के दौरान उतना मजा नहीं आता है। इसके अलावा ज्यादा फास्ट फूड खाने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिससे शरीर की ऊर्जा समाप्त हो जाती है और सेक्स करने की इच्छा नहीं होती है।

धूम्रपान और शराब की लत -
काम के तनाव से बचने के लिए लोग धूम्रपान शुरू कर देते हैं। धूम्रपान करने वालों को लगता है कि इससे दिमाग का तनाव कम होगा। कई लोग तो शराब को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपना लेते हैं। इसका असर सेक्स लाइफ पर पडता है। शराब पीने के बाद सेक्स की इच्छा नहीं होती है। सेक्स के दौरान सांसों की गति तेज हो जाती है और ज्यादा धूम्रपान आपके फेफडों को कमजोर बनाता है जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत होती है।

जीवनशैली बदलकर बनाएं बेहतर सेक्स लाइफ -

1. सेक्स लाइफ को बेहतर करने के लिए हर रोज व्यायाम और योगा कीजिए जिसके कारण आपका शरीर स्वस्थ रहेगा और आप अपने पार्टनर को संतुष्ट रख सकते हैं।
2. ऑफिस के काम का तनाव घर पर मत ले जाइए। अपने स्ट्रेस को सेक्स के दौरान भूल जाइए।
3. जंक फूड, फास्ट फूड, रेड मीट और ज्यादा तले हुए खाने से बचें। इन खाद्य-पदार्थों को खाने से शरीर को ज्यादा वसा मिलती है जिसके कारण मोटापा बढता है।
4. एनर्जी देने वाले और विटामिन से भरपूर खाद्य-पदार्थों को अपनी जीवनशैली में शमिल कीजिए जिससे कि सेक्स के दौरान आपके अंदर भरपूर ऊर्जा हो।
5. स्मोंकिंग और एल्कोहल छोडकर सेक्स लाइफ को बेहतर किया जा सकता है।
6. व्यस्त जीवनशैली में सेक्स लाइफ को नजरअंदाज करना गलत है। सेक्स बहुत ही अच्छा व्यायाम होता है और इससे दिमाग की टेंशन भी समाप्त होती है। इसलिए बदली हुई जीवनशैली में भी सेक्स का भरपूर मजा लेना चाहिए।

आपकी जीवनशैली और सेक्स लाइफ:

यूं करें कामसूत्र की शुरुआत:






कामसूत्र, सेक्स, यौवन: यह शब्द सुनते ही आम तौर पर लोगों के मन में अजीब विचार आने लग जाते हैं। इसका मुख्य कारण हमरे देश और समाज में सम्भोग व शारीरिक संबंधों के प्रति फैली गलत मानसिकता तथा सही जानकारियों का अभाव होना है।

वास्तव में प्रेम की उत्पत्ति सिर्फ मन या हृदय में ही नहीं होती शरीर में भी होती है। स्त्री-पुरुष यदि एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते हैं तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करने का कोई महत्व नहीं। प्रेम की शुरुआत ही शरीर से होती है।और संभोग ही दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला भी है।

कामसूत्र के बारे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह व्‍यक्ति के सामाजिक और निजी जीवन के हर भाग को समाहित करता है। यह वहां पहुंचता है जहां आमतौर पर व्‍यक्ति की दृष्टि नहीं पहुंचती। यह न केवल काम की बात करता है, बल्कि प्रेम की प्रवृत्ति, परिवार की भूमिका और परिवार की महत्ता आदि के बारे में भी विस्‍तृत चर्चा करता है।

दांपत्य जीवन का प्रारंभ करने वाले सभी लोगों को कामसूत्र को कम से कम एक बार तो अवश्य पढना चाहिए। कामसूत्र महज एक ग्रंथ अथवा सम्भोग पुराण मात्र नहीं है, बल्कि यह गृहस्थ जीवन को सही तरीके से जीने का सलीका भी बताता है। यह बताता है कि किस प्रकार आप अपने साथी के साथ कुछ बातों का खयाल रख नीरस संबंधों को आनंदमय और उत्साहपूर्ण बनाता है।

सम्भोग से पहले अपने सभी संकोचों और शर्म को दरकिनार कर दें। अपने साथी को भी अच्छा महसूस करने में सहायता करें। फिर अपनी साथी कि पोशाक को आहिस्ता से खोलें और अपने सीधे हाथ से पकड़ते हुए गले से लगायें। अब किसी हलके-फुल्के सामान्य विषय पर चर्चा करना शुरू करें। ध्यान रहे कि चर्चा के लिए कोई गंभीर विषय का चुनाव न करें। यह भी ध्यान रखें कि वार्तालाप में आपके साथी की भी बराबर भागीदारी बनी रहे।

कुछ आसनों का भी आनंद लें:

ऐसा माना जाता है कि जब संभोग की चरम अवस्था होती है उस वक्त विचार खो जाते हैं। इस दशा में जो आनंद की अनुभूति होती है वह समाधि के चरम आनंद की एक झलक मात्र है। संभोग के अंतिम क्षण में होश में रहने से ही पता चलता है कि ध्यान क्या है।और निर्विचार हो जाना ही समाधि की ओर रखा गया पहला कदम है।

यदि आपके योंन जीवन में असंतुष्टि की स्थिति में हो तो संबंधों के ख़राब होने यहाँ तक की टूट जाने की नौबत आ जाती है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपने साथी के साथ खुलकर बात करें और वर्तमान व भविष्य में हो सकने वाली समस्यों से बच सकें।

साथ ही कामसूत्र आपको इस बात की जानकारी देता है की किस तरह आप अपने दांपत्य जीवन में अपने साथी के साथ संबंधों में सामंजस बना कर उसे और अधिक खुशहाल, और रोमांचक बना सकतें हैं।

यूं करें कामसूत्र की शुरुआत:



ऐसे चुनें कामसूत्र का सर्वश्रेष्ठ आसन:

कामसूत्र में रतिक्रीड़ा के अनेकों आसनों का वर्णन है जो सम्भोग में चरम प्राप्ति के लिए मार्गदर्शित करता है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से उनमें से कोई भी चुन सकते हैं। आइए जानते हैं कामसूत्र के कुछ आसनों के बारे में-

मकड़ आसन:

सम्भोग के इस आसन में पुरुष अपनी टांगों को सामने की तरफ ख़ोलकर बैठता है और संतुलन के लिए अपने हाथों को पीछे की ओर लगा देता है। महिला साथी भी पुरुष की ओर वैसी ही स्थिति बनाकर बैठ जाती है। अब दोनों साथी सामंजस्‍य और लय में हिलकर रतिक्रीड़ा शुरू करते हैं। पुरुष इस दौरान महिला का भार अपने कूल्हों और हाथों पैर ले लेता है। महिला साथी भी घुटनों को मोड़कर व ताल से ताल मिलकर, चरम प्राप्ति के लिए पूर्ण सहयोग करती है।

वुमन ऑन टॉप:

कामसूत्र के इस आसन में स्त्री को अपना पूरा सहयोग देने का मौका मिलता है। साथ ही वह सम्भोग की क्रिया को अपनी इच्छा अनुसार नियंत्रित व चयनित करती है। वुमन ओन टॉप पोजीशन में दोनों साथी आरामदायक स्तिथि में सम्भोग का आनंद ले सकतें है।

मेजिक माउंटेन आसन :

इस आसन में तकियो के ढेर का एक पर्वत जैसा बना लिया जाता है। महिला साथी ताकियों के ढेर पर घुटने टेक कर उकडू लेट जाती है। इन ताकियो का सहारा लेकर महिला अपनी टांगों को थोडा खोल देती है इसके बाद दोनों रतिक्रीड़ा आरंभ करते हैं।

मैन ऑन टॉप :

यह शायद सम्भोग की सबसे अधिक बार इस्तेमाल किये जाने वाली तथा सबसे आम स्थिति है। इस अवस्था में बाजी पुरुष के हाथ में होती है। इसमें मुख्‍यत: स्त्री का कोई विशेष योगदान नहीं होता। यहां पुरुष अपनी गति पर पूरी तरह नियंत्रण रख सकता है। 'मैन ऑन टॉप' अवस्था का लाभ यह है कि सम्भोग क्रिया के दौरान पुरुष, स्त्री को होठों, गले व कान आदि पर चुम्बन कर सकता है। साथ ही दोनों एक दूसरे को आंखों में आंखें डाल कर देख सकते हैं।

सीटिड बॉल :

सीटिड बॉल आसन में दोनों साथी आधी बैठी अवस्था में होते हैं। महिला पुरुष के ऊपर थोड़ी झुकी हुई अवस्था में होती है और पुरुष सम्भोग कर रहा होता है। जब पुरुष महिला साथी को पीठ पर चुम्बन कर रहा होता है तब गतिविधि को अपनी एड़ी द्वारा नियंत्रित करती है। सम्भोग की इस क्रिया में बहुत लचक की ज़रूरत होती है किन्तु इस आसन में पुरुष, महिला के उन अंगों को भी तरजीह दे पाता है जो सामान्यतः ध्यान से परे होते हैं। यदि आप लचीले है तो आपको यह आसन अवश्य लेना चाहिए।

टॉड पोजीशन:

इस आसन में महिला पैरों को खोलकर पीठ के बल लेट जाती है और पुरुष उसके पैरों के बीच लेटता है। महिला अपने पेरों को पुरुष साथी के कूल्हों के चोरों तरफ जकड लेती है और पेरों द्वारा पुरुष के कूल्हों पर थोडा वज़न दाल कर उसे प्रेरित करती है। यह आसन दोनों को इच्छा अनुसार कोई भी गतिविधि व स्पर्श करने की सवतंत्रता देता है। सम्भोग के इस अन्तरंग आसन में महिला पुरुष को कमर और नीचे से उत्तेजित कर सकती है।

साइड किक पोजीशन: साइड किक आसन में महिला को पुरुष की तरफ पीठ के बल लेटना होता है। इस आसन में सम्भोग के समय पुरुष का एक घुटना महिला साथी के पैरों के बीच में व दूसरा उसके बराबर में स्थित होता है। पुरुष महिला को उसके नितंभों से पकड़ता है ताकि तीव्र गतिविधि कर सके, जबकि महिला अपने पैरों को फैलाती है जिससे अच्छा दृश्य मिलता है।

शोल्डर होल्डर पोजीशन: सम्भोग के इस आसन में महिला कमर के बल एक तकिये पर सिर रखकर लेटी होती है और उसके पैर हवा में होते हैं। पुरुष, महिला के पैरों को अपने कन्धों पर रखकर सामने की तरफ से सम्भोग करता है। पुरुष अपने एक हाथ को नीचे रख कर सहारा लेता है और रतिक्रिया करता है।

इस प्रकार आप और आपका साथी कामसूत्र का कोई भी आसन अपनी सुविधा और एक मत से चुन कर व्यवहार में ला सकते है। बस ध्यान रहे कि आप दोनों भी आसन को करने से पूर्व उसे अच्छी तरह से समझ व पढ़ लें ताकि आप एक दूसरे के साथ का पूरा आनंद ले सकें।

ऐसे चुनें कामसूत्र का सर्वश्रेष्ठ आसन: